राजस्थान की कला एवं संस्कृति अपनी रंगीनता, लोक परंपराओं और भव्य स्थापत्य के लिए विश्व प्रसिद्ध है। लोक नृत्य, लोक देवता, मेले-त्यौहार और हस्तकलाएँ RAS, REET एवं CET में बहुतायत से पूछी जाती हैं।
लोक नृत्य (Folk Dances)
- घूमर: राजस्थान का 'राज्य नृत्य', मुख्यतः महिलाओं द्वारा; मूलतः भीलों का नृत्य।
- कालबेलिया: सपेरा समुदाय का नृत्य; UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल।
- गैर, चंग, तेरहताली, कच्छी घोड़ी, भवाई: विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध लोक नृत्य।
लोक देवता एवं लोक देवियाँ
लोक देवता — पाबूजी, रामदेवजी (रुणिचा), गोगाजी, तेजाजी, देवनारायणजी, हड़बूजी, मेहाजी (राजस्थान के 'पाँच पीर')। लोक देवियाँ — करणी माता (देशनोक, बीकानेर — चूहों वाला मंदिर), जीण माता, शिला देवी, आईजी माता।
किले एवं स्थापत्य (Forts & Architecture)
राजस्थान के 6 पहाड़ी किले UNESCO विश्व धरोहर में शामिल हैं: चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़ (विश्व की दूसरी सबसे लंबी दीवार), रणथम्भौर, आमेर, जैसलमेर (सोनार किला — एकमात्र 'जीवित दुर्ग') एवं गागरोन (जल दुर्ग)।
चित्रकला शैलियाँ
| शैली | विशेषता |
|---|---|
| मेवाड़ शैली | प्राचीनतम; उदयपुर |
| किशनगढ़ शैली | 'बणी-ठणी' चित्र के लिए प्रसिद्ध |
| जयपुर/ढूँढाड़ शैली | भव्यता एवं पोर्ट्रेट |
मेले, त्यौहार एवं हस्तकला
- प्रमुख मेले: पुष्कर मेला (अजमेर), गोगामेड़ी, कैला देवी, रामदेवरा।
- त्यौहार: गणगौर, तीज — राजस्थान की स्त्रियों के प्रमुख पर्व।
- हस्तकला: बंधेज (टाई-डाई), ब्लू पॉटरी (जयपुर), थेवा कला (प्रतापगढ़), उस्ता कला (बीकानेर)।