लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
Democratic Upsurge and Coalition Politics
लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (Democratic Upsurge and Coalition Politics)
एक नज़र में:
यह अध्याय भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में उत्पन्न हुए संकट, 1960-80 के दशक के राजनीतिक अस्थिरता, आपातकाल, और गठबंधन राजनीति के उदय का विश्लेषण करता है। (This chapter analyses the crisis in Indian democracy, political instability between 1960-80, the Emergency, and the rise of coalition politics.)
📌 अध्याय का परिचय (Chapter Introduction)
भारत के स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास हुआ, परंतु 1960 के दशक के उत्तरार्ध में अनेक राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक कारणों से लोकतंत्र को संकट का सामना करना पड़ा। इस दौरान केंद्र और राज्यों में सरकारों का अस्थिर होना, विपक्ष के बढ़ते प्रभाव, आपातकाल की घोषणा, और उसके बाद गठबंधन राजनीति का उदय – ये सभी घटनाएँ भारतीय राजनीति के लिए निर्णायक सिद्ध हुईं।
After independence, India tried to strengthen its democratic system. However, from the late 1960s, several political, social, and economic factors led to a crisis in democracy. Government instability at the Centre and states, rise of the opposition, the declaration of Emergency, and the emergence of coalition politics became decisive events in Indian politics.
📖 मुख्य विषय-वस्तु (Main Topics)
1. लोकतंत्र का संकट: पृष्ठभूमि (Crisis of Democracy: Background)
परिभाषा: लोकतंत्र के समक्ष उत्पन्न ऐसी परिस्थितियाँ, जिनसे उसकी स्थिरता, विश्वसनीयता और कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लग जाए, उसे लोकतंत्र का संकट कहा जाता है।
A situation where the stability, credibility, and efficiency of democracy are questioned is called a crisis of democracy.
समझाइए: 1947-1967 तक कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा और राजनीतिक व्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर थी। 1967 के बाद, कांग्रेस के एकाधिकार में कमी, विपक्षी दलों की शक्ति में वृद्धि, तथा राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारों का गठन हुआ। इससे सत्ता संतुलन, प्रशासनिक दक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को चुनौती मिली।
From 1947-1967, Congress dominated and the political system was relatively stable. After 1967, Congress lost monopoly, opposition parties gained strength, and non-Congress governments formed in states. This challenged power balance, administrative efficiency, and democratic values.
2. 1967 का चुनाव और राजनीतिक बदलाव (1967 Elections & Political Changes)
मुख्य बिंदु:
- 1967 के चुनावों में कांग्रेस को पहली बार गंभीर चुनौती मिली।
- कई राज्यों में कांग्रेस हार गई और गैर-कांग्रेसी दलों ने सरकार बनाई।
- केन्द्र में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई और आंतरिक असंतोष बढ़ा।
- "संयुक्त विधायक दल" (SAMYUKTA VIDHAYAK DAL) सरकारों का गठन हुआ।
- क्षेत्रीय दलों का उदय हुआ।
In 1967, Congress faced a serious challenge for the first time. It lost many states and non-Congress governments were formed. Congress weakened at the Centre and internal dissent grew. Samyukta Vidhayak Dal governments formed, regional parties emerged.
महत्व:
- यह चुनाव भारतीय राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था (multi-party system) की शुरुआत का संकेत था।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव की शुरुआत।
- विपक्षी एकजुटता और वैकल्पिक राजनीति का उदय।
This election signaled the start of a multi-party system, rising centre-state tensions, and emergence of opposition unity and alternative politics.
3. आपातकाल (Emergency: 1975-77)
परिभाषा:
आपातकाल वह स्थिति है जब संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर देश में भीतरी या बाहरी संकट की स्थिति में विशेष शक्तियाँ लागू करता है।
Emergency is when, under Article 352, the President—on Prime Minister’s advice—enforces special powers in case of internal or external crisis.
घटनाक्रम:
- 25 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था के संकट का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की।
- नागरिक अधिकारों का निलंबन, प्रेस पर सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, और न्यायपालिका पर नियंत्रण।
- केंद्र सरकार की शक्तियाँ अत्यधिक बढ़ गईं।
- 21 महीनों बाद, 1977 में आम चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी सत्ता में आई।
On 25 June 1975, PM Indira Gandhi declared Emergency citing internal instability and law & order crisis. Civil rights suspended, press censored, opposition leaders arrested, judiciary controlled. Centre’s powers increased. After 21 months, 1977 general elections held, Congress lost, Janata Party came to power.
प्रभाव:
- लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभों (न्यायपालिका, विधायिका, प्रेस) की स्वायत्तता पर आघात।
- कार्यपालिका का वर्चस्व।
- नागरिक स्वतंत्रता का क्षय।
- आपातकाल के अनुभव से भारतीय लोकतंत्र ने संविधान की रक्षा के लिए कई सुधार किए।
Democracy’s basic pillars—judiciary, legislature, press—were undermined. Executive dominance increased. Civil liberties eroded. Emergency experience led to constitutional safeguards.
4. लोकतांत्रिक पुनरुत्थान और गठबंधन राजनीति (Democratic Resurgence & Coalition Politics)
जनता पार्टी सरकार (1977-79)
- 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने कांग्रेस को हराया।
- पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
- आपातकाल के विरुद्ध जनाक्रोश और विपक्षी एकता का परिणाम।
- सरकार आंतरिक मतभेदों के कारण 2 वर्ष में गिर गई।
In 1977, Janata Party defeated Congress, forming the first non-Congress central government. Result of public anger against Emergency and opposition unity. Government fell due to internal differences.
गठबंधन व्यवस्था का उदय (Rise of Coalition Politics)
- 1980 के बाद, कांग्रेस और अन्य दलों की स्पष्ट बहुमत सरकारें बनना कठिन हुआ।
- केंद्र में अल्पमत या गठबंधन सरकारों का दौर शुरू।
- क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा।
- नीति-निर्माण में राज्यों की भूमिका महत्त्वपूर्ण हुई।
After 1980, it became difficult for Congress or others to get a clear majority. Era of minority/coalition governments started. Regional parties became influential. States’ role in policy-making increased.
गठबंधन सरकार (Coalition Government): ऐसी सरकार जिसमें दो या दो से अधिक राजनीतिक दल मिलकर सत्ता साझा करते हैं, उसे गठबंधन सरकार कहते हैं।
A government in which two or more political parties share power is called a coalition government.
मुख्य उदाहरण:
- जनता दल (1989), यूनाइटेड फ्रंट (1996-98), एनडीए (1999), यूपीए (2004)।
- गठबंधन सरकारों ने लोकतंत्र में समावेशिता, क्षेत्रीयता, और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा दिया।
Janata Dal (1989), United Front (1996-98), NDA (1999), UPA (2004). Coalition governments promoted inclusiveness, regionalism, and consensus culture.
5. केंद्र-राज्य संबंधों में परिवर्तन (Changing Centre-State Relations)
पृष्ठभूमि:
- पहले केंद्र की शक्तियाँ अधिक थीं, राज्य अपेक्षाकृत निर्बल थे।
- 1967 के बाद राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनने से केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ा।
- राष्ट्रपति शासन (Article 356) का दुरुपयोग।
Earlier, Centre was stronger, states weaker. Non-Congress governments in states post-1967 led to increased centre-state tensions. Misuse of President’s Rule.
फैज़ल आयोग (Sarkaria Commission):
- 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा हेतु सरकार ने सरकारिया आयोग बनाया।
- आयोग की सिफारिशों से संघीय ढांचे को मजबूत करने के प्रयास हुए।
In 1983, Sarkaria Commission was formed to review centre-state relations. Its recommendations strengthened the federal structure.
6. लोकतंत्र के समक्ष चुनौतियाँ (Challenges to Democracy)
मुख्य चुनौतियाँ:
- राजनीतिक अस्थिरता (Political instability)
- भ्रष्टाचार (Corruption)
- क्षेत्रीयता और जातिवाद (Regionalism and Casteism)
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव (Centre-State tensions)
- लोकतांत्रिक संस्थाओं का कमजोर होना (Weakening of democratic institutions)
- मानवाधिकारों का हनन (Violation of human rights)
- राजनीति में आपराधिकरण (Criminalization of politics)
- गठबंधन सरकारों में नीति-निर्माण की जटिलता (Complexity of policy-making in coalition governments)
- चुनावी सुधारों की आवश्यकता (Need for electoral reforms)
- सामाजिक विषमता (Social inequality)
7. लोकतंत्र की उपलब्धियाँ एवं भविष्य (Achievements & Future of Democracy)
लोकतांत्रिक उपलब्धियाँ:
- सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण (Peaceful transfer of power)
- बहुदलीय व्यवस्था (Multi-party system)
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान (Respect for regional aspirations)
- नागरिक स्वतंत्रता की बहाली (Restoration of civil liberties)
- आर्थिक उदारीकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में प्रगति (Progress towards economic liberalization and social justice)
- संवैधानिक सुधार (Constitutional reforms)
भविष्य की दिशा:
- लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और समावेशी बनाना।
- गठबंधन राजनीति में स्थिरता सुनिश्चित करना।
- संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखना।
- क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता को लोकतांत्रिक ढाँचे में समाहित करना।
Making democracy more accountable, transparent, and inclusive. Ensuring stability in coalition politics. Maintaining institutional autonomy. Integrating regional and social diversity in democratic framework.
🧠 महत्वपूर्ण बिंदु (Key Points)
- 1967 के चुनावों ने भारतीय राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था की नींव रखी।
The 1967 elections laid the foundation of a multi-party system in Indian politics.
- आपातकाल (1975-77) भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा संकट था, जिसमें नागरिक अधिकारों का हनन हुआ।
The Emergency (1975-77) was the biggest crisis for Indian democracy, marked by erosion of civil rights.
- आपातकाल के बाद जनता पार्टी के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
After Emergency, the first non-Congress government was formed under Janata Party.
- गठबंधन राजनीति के कारण केंद्र और राज्यों में सत्ता संतुलन और नीति-निर्माण में विविधता आई।
Coalition politics led to diverse power-sharing and policy-making at Centre and state.
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव, राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग से बढ़ा।
Centre-state relations became tense due to the misuse of President’s Rule.
- सरकारिया आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों को सुधारने के लिए सिफारिशें दीं।
Sarkaria Commission recommended reforms for centre-state relations.
- राजनीति में जातिवाद, क्षेत्रीयता, भ्रष्टाचार, और आपराधिकरण जैसी चुनौतियाँ उभरीं।
Challenges like casteism, regionalism, corruption, and criminalization emerged.
- गठबंधन सरकारों ने क्षेत्रीय और अल्पसंख्यक हितों को प्रतिनिधित्व दिया।
Coalition governments gave representation to regional and minority interests.
- लोकतंत्र की स्थिरता के लिए संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता जरूरी है।
Autonomy of constitutional institutions is essential for democratic stability.
- भारतीय लोकतंत्र ने संकटों से सीखते हुए खुद को मजबूत किया है।
Indian democracy has strengthened itself by learning from crises.
⚠️ सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)
| क्रमांक (No.) | सामान्य गलती (Common Mistake) | सुधार (Correction) | |---------------|---------------------------------------------------|----------------------------------------------| | 1 | आपातकाल को केवल बाहरी खतरे से जोड़ना | आपातकाल भीतरी अस्थिरता के कारण लगा था। | | 2 | गठबंधन सरकारों को हमेशा अस्थिर मानना | कई गठबंधन सरकारें सफलतापूर्वक चली हैं। | | 3 | 1967 से पहले ही बहुदलीय व्यवस्था मानना | 1967 से बहुदलीय राजनीति की शुरुआत मानी जाती है।| | 4 | सरकारिया आयोग को केंद्र सरकार की समिति कहना | यह एक स्वतंत्र आयोग था। | | 5 | आपातकाल के दौरान चुनावों का होना सोचना | आपातकाल के दौरान चुनाव नहीं हुए थे। | | 6 | केवल कांग्रेस को लोकतंत्र की रक्षक मानना | विपक्षी दलों ने भी लोकतंत्र की रक्षा की। | | 7 | केंद्र-राज्य संबंधों में केवल केंद्र को दोष देना | राज्यों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। | | 8 | गठबंधन सरकारों को विकास विरोधी मानना | कई बार गठबंधन सरकारों ने भी विकास किया है। | | 9 | आपातकाल के बाद लोकतंत्र समाप्त हो गया सोचना | लोकतंत्र बहाल हुआ और और मजबूत हुआ। | | 10 | क्षेत्रीय दलों को केवल क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित मानना| वे राष्ट्रीय मुद्दों में भी भूमिका निभाते हैं। |
📝 RBSE परीक्षा प्रश्न (Exam Questions)
1-Mark Questions (1 अंक वाले प्रश्न)
- आपातकाल किस वर्ष लगाया गया था?
उत्तर: 1975
In which year was the Emergency imposed?
- सरकारिया आयोग किस संबंध में बना था?
उत्तर: केंद्र-राज्य संबंध
Sarkaria Commission was related to?
- 1967 के चुनावों के बाद किस प्रकार की सरकारों का गठन हुआ?
उत्तर: गठबंधन/संयुक्त विधायक दल सरकारें
What type of governments were formed after 1967 elections?
- भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत आपातकाल लगाया जाता है?
उत्तर: अनुच्छेद 352 (Article 352)
Under which Article of Indian Constitution is Emergency imposed?
- जनता पार्टी सरकार कितने वर्षों तक चली?
उत्तर: लगभग 2 वर्ष
How long did Janata Party government last?
2-Mark Questions (2 अंक वाले प्रश्न)
- बहुदलीय व्यवस्था से क्या अभिप्रेत है?
उत्तर: ऐसी राजनीतिक व्यवस्था जिसमें दो से अधिक दल सक्रिय रूप से चुनाव लड़ते हैं और सत्ता में भागीदारी करते हैं, उसे बहुदलीय व्यवस्था कहते हैं।
What is meant by multi-party system? A political system where more than two parties actively contest elections and share power is called a multi-party system.
- आपातकाल के दौरान नागरिकों के कौन-कौन से अधिकार निलंबित कर दिए गए थे?
उत्तर: मौलिक अधिकार, विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21), प्रेस की स्वतंत्रता, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
Which rights of citizens were suspended during Emergency? Fundamental rights, especially personal liberty (Article 21), freedom of press, and freedom of expression.
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव के दो कारण लिखिए।
उत्तर:
Mention two causes of tension in Centre-State relations.
- राष्ट्रपति शासन (Article 356) का दुरुपयोग
- राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारों के साथ भेदभाव
Misuse of President’s Rule; Discrimination against non-Congress state governments.
- सरकारिया आयोग की कोई दो सिफारिशें लिखिए।
उत्तर:
Write any two recommendations of Sarkaria Commission.
- राष्ट्रपति शासन का दुरुपयोग न हो
- राज्यों को अधिक स्वायत्तता मिले
No misuse of President’s Rule; States should get more autonomy.
- गठबंधन सरकार की कोई एक विशेषता लिखिए।
उत्तर: सत्ता साझा करना (Power sharing among parties)
Mention one feature of coalition government.
5-Mark Questions (5 अंक वाले प्रश्न)
- आपातकाल (1975-77) के प्रमुख कारण और प्रभावों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Describe in detail the main causes and effects of the Emergency (1975-77).
उत्तर: कारण:
- राजनीतिक अस्थिरता, विपक्ष के आंदोलन
- न्यायपालिका द्वारा इंदिरा गांधी की चुनावी अयोग्यता
- आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का संकट
Main causes: Political instability, opposition agitation, Indira Gandhi’s election disqualification by judiciary, internal security and law & order crisis.
प्रभाव:
- मौलिक अधिकारों का निलंबन
- प्रेस सेंसरशिप
- विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आघात
- लोकतंत्र की नींव कमजोर हुई
- आपातकाल के बाद लोकतंत्र की रक्षा हेतु संवैधानिक सुधार
Effects: Suspension of fundamental rights, press censorship, arrest of opposition leaders, attack on judicial independence, weakening of democracy, constitutional safeguards after Emergency.
- 1967 के चुनावों ने भारतीय राजनीति को किस प्रकार बदल दिया?
How did the 1967 elections change Indian politics?
उत्तर:
- कांग्रेस का एकाधिकार टूटा
- कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं
- विपक्षी दलों का महत्त्व बढ़ा
- बहुदलीय व्यवस्था की शुरुआत
- केंद्र-राज्य संबंधों में नया संतुलन
Broke Congress monopoly, non-Congress governments in states, rise in opposition’s importance, start of multi-party system, new balance in centre-state relations.
- गठबंधन राजनीति के लाभ और हानियाँ स्पष्ट कीजिए।
Explain the advantages and disadvantages of coalition politics.
उत्तर: लाभ (Advantages):
- क्षेत्रीय और विविध हितों का प्रतिनिधित्व
- सहमति और समावेशिता
- सत्ता का विकेंद्रीकरण
Representation of regional and diverse interests, consensus and inclusiveness, decentralization of power.
हानियाँ (Disadvantages):
- राजनीतिक अस्थिरता
- नीतिगत निर्णयों में जटिलता
- दबाव की राजनीति
Political instability, complexity in policy decisions, pressure politics.
- केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार हेतु सरकारिया आयोग की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
Evaluate the role of Sarkaria Commission in improving centre-state relations.
उत्तर: सरकारिया आयोग ने केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा कर कई सिफारिशें दीं, जैसे राष्ट्रपति शासन का दुरुपयोग न हो, राज्यों को अधिक स्वायत्तता मिले, वित्तीय अधिकारों का संतुलित वितरण हो, आदि। आयोग की सिफारिशों से संघीय ढाँचा मजबूत हुआ और केंद्र-राज्य संबंधों में विश्वास बढ़ा।
Sarkaria Commission reviewed centre-state relations and gave recommendations like no misuse of President’s Rule, greater state autonomy, balanced financial powers etc. It strengthened the federal structure and increased trust.
- लोकतंत्र के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ और उनसे निपटने के उपाय लिखिए।
Write major challenges to democracy and suggest measures to tackle them.
उत्तर: चुनौतियाँ:
- राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, जातिवाद, आपराधिकरण, संस्थाओं की कमजोरी
Political instability, corruption, casteism, criminalization, institutional weakness
उपाय (Measures):
- चुनावी सुधार
- पारदर्शिता और जवाबदेही
- न्यायपालिका और प्रेस की स्वतंत्रता
- नागरिक शिक्षा
- क्षेत्रीय और सामाजिक समावेशिता
Electoral reforms, transparency and accountability, judicial and press freedom, civic education, regional and social inclusiveness.
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मुख्य बिंदु (Key Points)
- 1967 के बाद भारत में कांग्रेस पार्टी के वर्चस्व का क्षय हुआ, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में संकट उत्पन्न हुआ।
- क्षेत्रीय पार्टियों के उदय ने एकदलीय प्रणाली को चुनौती दी और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया।
- इस दौर में दल-बदल और राज्य सरकारों में अस्थिरता सामान्य हो गई।
- आपातकाल (1975-77) भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ा संकट था, जिसमें नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया।
- आपातकाल के बाद जनता पार्टी ने सरकार बनाई, जो केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार थी।
- कोई भी पार्टी लोकसभा में पूर्ण बहुमत नहीं ला सकी, जिससे गठबंधन राजनीति का उदय हुआ।
- गठबंधन सरकारों के लिए कई दलों के बीच सहमति और सहयोग आवश्यक था।
- इस समय जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर पहचान की राजनीति का उदय हुआ।
- लोकतांत्रिक उभार ने वंचित वर्गों को सशक्त किया और उनकी राजनीतिक भागीदारी बढ़ाई।
- अस्थिरता के बावजूद, गठबंधन राजनीति ने विविध आवाजों को शामिल कर लोकतंत्र को गहरा किया।
- इस युग ने भारतीय राजनीति में संघवाद और विकेंद्रीकरण के महत्व को रेखांकित किया।
- लोकतांत्रिक उभार और गठबंधन राजनीति ने भारतीय लोकतंत्र की बहुलतावादी और समावेशी प्रकृति को आकार दिया।
- "संयुक्त विधायक दल" (SAMYUKTA VIDHAYAK DAL) सरकारों का गठन हुआ।
- 1967 के चुनावों में कांग्रेस को पहली बार गंभीर चुनौती मिली।
- 1967 के बाद राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनने से केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ा।
- 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने कांग्रेस को हराया।
- 1980 के बाद, कांग्रेस और अन्य दलों की स्पष्ट बहुमत सरकारें बनना कठिन हुआ।
- 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा हेतु सरकार ने सरकारिया आयोग बनाया।
- 21 महीनों बाद, 1977 में आम चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी सत्ता में आई।
- 25 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था के संकट का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की।
- आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का संकट
- आपातकाल के अनुभव से भारतीय लोकतंत्र ने संविधान की रक्षा के लिए कई सुधार किए।
- आपातकाल के बाद लोकतंत्र की रक्षा हेतु संवैधानिक सुधार
- आपातकाल के विरुद्ध जनाक्रोश और विपक्षी एकता का परिणाम।
- आयोग की सिफारिशों से संघीय ढांचे को मजबूत करने के प्रयास हुए।
- आर्थिक उदारीकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में प्रगति (Progress towards economic liberalization and social justice)
- कई राज्यों में कांग्रेस हार गई और गैर-कांग्रेसी दलों ने सरकार बनाई।
- कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं
- केंद्र में अल्पमत या गठबंधन सरकारों का दौर शुरू।
- केंद्र सरकार की शक्तियाँ अत्यधिक बढ़ गईं।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव की शुरुआत।
- केंद्र-राज्य संबंधों में नया संतुलन
- केन्द्र में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई और आंतरिक असंतोष बढ़ा।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान (Respect for regional aspirations)
- क्षेत्रीय और विविध हितों का प्रतिनिधित्व
- क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता को लोकतांत्रिक ढाँचे में समाहित करना।
- क्षेत्रीय और सामाजिक समावेशिता
- क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा।
- गठबंधन राजनीति में स्थिरता सुनिश्चित करना।
- गठबंधन सरकारों ने लोकतंत्र में समावेशिता, क्षेत्रीयता, और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा दिया।
- जनता दल (1989), यूनाइटेड फ्रंट (1996-98), एनडीए (1999), यूपीए (2004)।
- नागरिक अधिकारों का निलंबन, प्रेस पर सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, और न्यायपालिका पर नियंत्रण।
- नागरिक स्वतंत्रता की बहाली (Restoration of civil liberties)
- नीति-निर्माण में राज्यों की भूमिका महत्त्वपूर्ण हुई।
- न्यायपालिका और प्रेस की स्वतंत्रता
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आघात
- न्यायपालिका द्वारा इंदिरा गांधी की चुनावी अयोग्यता
- पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
- पहले केंद्र की शक्तियाँ अधिक थीं, राज्य अपेक्षाकृत निर्बल थे।
- बहुदलीय व्यवस्था (Multi-party system)
- यह चुनाव भारतीय राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था (multi-party system) की शुरुआत का संकेत था।
- राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, जातिवाद, आपराधिकरण, संस्थाओं की कमजोरी
- राजनीतिक अस्थिरता, विपक्ष के आंदोलन
- राष्ट्रपति शासन (Article 356) का दुरुपयोग।
- लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभों (न्यायपालिका, विधायिका, प्रेस) की स्वायत्तता पर आघात।
- लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और समावेशी बनाना।
- विपक्षी एकजुटता और वैकल्पिक राजनीति का उदय।
- सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण (Peaceful transfer of power)
- सरकार आंतरिक मतभेदों के कारण 2 वर्ष में गिर गई।
- संवैधानिक सुधार (Constitutional reforms)
- संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखना।
Key Points
- The period after 1967 in India witnessed the weakening of the Congress party's dominance, leading to a crisis in the democratic system.
- The rise of regional parties challenged the one-party system and increased political competition.
- Frequent defections and instability in state governments became common during this period.
- The Emergency (1975-77) was a major crisis for Indian democracy, leading to the suspension of civil liberties.
- Post-Emergency, the Janata Party formed the government, marking the first non-Congress government at the centre.
- Coalition politics emerged as no single party could secure an absolute majority in Lok Sabha.
- Coalition governments required consensus and cooperation among multiple parties.
- This period saw the rise of identity politics based on caste, religion, and region.
- Democratic upsurge empowered marginalized groups and increased their political participation.
- Despite instability, coalition politics deepened democracy by including diverse voices.
- The era highlighted the importance of federalism and decentralization in Indian politics.
- Democratic upsurge and coalition politics shaped the pluralistic and inclusive nature of Indian democracy.
- "संयुक्त विधायक दल" (SAMYUKTA VIDHAYAK DAL) सरकारों का गठन हुआ।
- 1967 के चुनावों में कांग्रेस को पहली बार गंभीर चुनौती मिली।
- 1967 के बाद राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनने से केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव बढ़ा।
- 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने कांग्रेस को हराया।
- 1980 के बाद, कांग्रेस और अन्य दलों की स्पष्ट बहुमत सरकारें बनना कठिन हुआ।
- 1983 में केंद्र-राज्य संबंधों की समीक्षा हेतु सरकार ने सरकारिया आयोग बनाया।
- 21 महीनों बाद, 1977 में आम चुनाव हुए, जिसमें कांग्रेस की हार हुई और जनता पार्टी सत्ता में आई।
- 25 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आंतरिक अस्थिरता और कानून-व्यवस्था के संकट का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की।
- आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का संकट
- आपातकाल के अनुभव से भारतीय लोकतंत्र ने संविधान की रक्षा के लिए कई सुधार किए।
- आपातकाल के बाद लोकतंत्र की रक्षा हेतु संवैधानिक सुधार
- आपातकाल के विरुद्ध जनाक्रोश और विपक्षी एकता का परिणाम।
- आयोग की सिफारिशों से संघीय ढांचे को मजबूत करने के प्रयास हुए।
- आर्थिक उदारीकरण और सामाजिक न्याय की दिशा में प्रगति (Progress towards economic liberalization and social justice)
- कई राज्यों में कांग्रेस हार गई और गैर-कांग्रेसी दलों ने सरकार बनाई।
- कई राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनीं
- केंद्र में अल्पमत या गठबंधन सरकारों का दौर शुरू।
- केंद्र सरकार की शक्तियाँ अत्यधिक बढ़ गईं।
- केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव की शुरुआत।
- केंद्र-राज्य संबंधों में नया संतुलन
- केन्द्र में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई और आंतरिक असंतोष बढ़ा।
- क्षेत्रीय आकांक्षाओं का सम्मान (Respect for regional aspirations)
- क्षेत्रीय और विविध हितों का प्रतिनिधित्व
- क्षेत्रीय और सामाजिक विविधता को लोकतांत्रिक ढाँचे में समाहित करना।
- क्षेत्रीय और सामाजिक समावेशिता
- क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा।
- गठबंधन राजनीति में स्थिरता सुनिश्चित करना।
- गठबंधन सरकारों ने लोकतंत्र में समावेशिता, क्षेत्रीयता, और सहमति की संस्कृति को बढ़ावा दिया।
- जनता दल (1989), यूनाइटेड फ्रंट (1996-98), एनडीए (1999), यूपीए (2004)।
- नागरिक अधिकारों का निलंबन, प्रेस पर सेंसरशिप, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी, और न्यायपालिका पर नियंत्रण।
- नागरिक स्वतंत्रता की बहाली (Restoration of civil liberties)
- नीति-निर्माण में राज्यों की भूमिका महत्त्वपूर्ण हुई।
- न्यायपालिका और प्रेस की स्वतंत्रता
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आघात
- न्यायपालिका द्वारा इंदिरा गांधी की चुनावी अयोग्यता
- पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
- पहले केंद्र की शक्तियाँ अधिक थीं, राज्य अपेक्षाकृत निर्बल थे।
- बहुदलीय व्यवस्था (Multi-party system)
- यह चुनाव भारतीय राजनीति में बहुदलीय व्यवस्था (multi-party system) की शुरुआत का संकेत था।
- राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, जातिवाद, आपराधिकरण, संस्थाओं की कमजोरी
- राजनीतिक अस्थिरता, विपक्ष के आंदोलन
- राष्ट्रपति शासन (Article 356) का दुरुपयोग।
- लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभों (न्यायपालिका, विधायिका, प्रेस) की स्वायत्तता पर आघात।
- लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और समावेशी बनाना।
- विपक्षी एकजुटता और वैकल्पिक राजनीति का उदय।
- सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण (Peaceful transfer of power)
- सरकार आंतरिक मतभेदों के कारण 2 वर्ष में गिर गई।
- संवैधानिक सुधार (Constitutional reforms)
- संस्थाओं की स्वायत्तता बनाए रखना।
इंटरैक्टिव अभ्यास (MCQ)
भारत में 'लोकतांत्रिक उभार' की शुरुआत किस वर्ष मानी जाती है?
'गठबंधन राजनीति' को निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द सबसे उपयुक्त रूप में परिभाषित करता है?
निम्नलिखित में से कौन-सा 1977 के आम चुनावों का प्रत्यक्ष परिणाम था?
निम्नलिखित में से कौन-सा गठबंधन सरकारों की विशेषता नहीं है?
1999 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार का नेतृत्व किस पार्टी ने किया?
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लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट lock
लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट (Democratic Upsurge and Coalition Politics) एक नज़र में: यह अध्याय भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में उत्पन्न हुए संकट, 1960-80 के…
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