menu_bookRBSE · अर्थशास्त्र (Economics) · अध्याय 10

पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत

Theory of the Firm under Perfect Competition

schedule~30 मिनट

पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत

Theory of the Firm under Perfect Competition

एक नज़र में:

पूर्ण प्रतिस्पर्धा (Perfect Competition) वह स्थिति है जिसमें कई फर्में एकसमान उत्पाद बेचती हैं तथा बाजार में किसी भी फर्म का मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण नहीं होता। इस अध्याय में, हम जानेंगे कि पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म कैसे उत्पादन और मूल्य का निर्धारण करती है, लाभ की अधिकतम स्थिति कैसे प्राप्त करती है, और दीर्घ एवं अल्पावधि में फर्मों का व्यवहार क्या होता है।

In a nutshell: Perfect competition is a market scenario where numerous firms sell identical products, and no single firm can influence the market price. This chapter explains how a firm sets output and price, achieves maximum profit, and behaves in the short and long run under perfect competition.


📌 अध्याय का परिचय

परिचय (Introduction)

अर्थशास्त्र में, ‘पूर्ण प्रतिस्पर्धा’ (Perfect Competition) एक आदर्श बाजार संरचना है जिसमें कई फर्में एकसमान वस्तुएँ बेचती हैं, बाजार में प्रवेश और निकास पूर्णतः स्वतंत्र है, और सभी खरीदार-विक्रेता के पास संपूर्ण जानकारी होती है।

In Economics, 'Perfect Competition' is an ideal market structure where many firms sell homogeneous goods, entry and exit are completely free, and all buyers and sellers have complete information.

इस अध्याय में, हम निम्नलिखित विषयों का अध्ययन करेंगे:

  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा की विशेषताएँ
  • फर्म की मांग व राजस्व
  • लाभ अधिकतमकरण (Profit Maximization)
  • अल्पावधि (Short Run) एवं दीर्घावधि (Long Run) में फर्म का संतुलन
  • बाजार की आपूर्ति (Market Supply)
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा के लाभ और सीमाएँ

📖 प्रमुख विषयवस्तु (Main Topics)


1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की विशेषताएँ (Features of Perfect Competition)

परिभाषा (Definition): पूर्ण प्रतिस्पर्धा वह बाजार स्थिति है जिसमें बड़ी संख्या में फर्में समान वस्तु का विक्रय करती हैं, और कोई भी फर्म बाजार मूल्य पर नियंत्रण नहीं रखती।

Perfect competition is a market structure in which a large number of firms sell identical products, and no single firm can control the market price.

मुख्य विशेषताएँ (Main Features):

  1. कई खरीदार व विक्रेता (Large Number of Buyers and Sellers):

सभी फर्में इतनी छोटी होती हैं कि किसी एक के उत्पादन में परिवर्तन से बाजार मूल्य प्रभावित नहीं होता।

All firms are so small that changes in the output of a single firm do not affect the market price.

  1. एकसमान वस्तु (Homogeneous Product):

सभी फर्में एक ही प्रकार की वस्तु बनाती-बेचती हैं, जिससे खरीदार के लिए किसी एक फर्म की वस्तु का चयन करना अर्थहीन है।

All firms produce and sell standardized products, so buyers have no preference for any firm's product.

  1. मूल्य निर्धारण में स्वतंत्रता का अभाव (Price Taker):

प्रत्येक फर्म 'मूल्य-ग्रहिता' होती है, न कि 'मूल्य-निर्धारक'।

Each firm is a 'price taker', not a 'price maker'.

  1. मुक्त प्रवेश व निर्गमन (Free Entry and Exit):

फर्में बाजार में स्वतंत्र रूप से प्रवेश या निकास कर सकती हैं।

Firms can freely enter or exit the market.

  1. संपूर्ण जानकारी (Perfect Knowledge):

सभी खरीदारों और विक्रेताओं के पास बाजार संबंधी पूर्ण जानकारी होती है।

All buyers and sellers have perfect knowledge about the market.

  1. परिवहन लागत नगण्य (No Transportation Cost):

वस्तुओं के स्थानांतरण में कोई अतिरिक्त लागत नहीं होती।

There are negligible transportation costs.

  1. विज्ञापन का अभाव (Absence of Advertisement):

उत्पाद एकसमान होने के कारण विज्ञापन की आवश्यकता नहीं।

No need for advertisements since products are identical.

निष्कर्ष: इन सभी विशेषताओं के कारण, पूर्ण प्रतिस्पर्धा में प्रत्येक फर्म को बाजार मूल्य को स्वीकार करना पड़ता है और वह अपने उत्पादन के स्तर को इस आधार पर तय करती है कि उसे अधिकतम लाभ कैसे मिलेगा।

Due to these features, each firm in perfect competition must accept the market price and decide its output level to maximize profit.


2. फर्म की मांग व राजस्व (Firm’s Demand and Revenue)

(A) फर्म की मांग वक्र (Firm’s Demand Curve)

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में, फर्म का मांग वक्र क्षैतिज (Horizontal) होता है, अर्थात् वह बाजार मूल्य पर किसी भी मात्रा में वस्तु बेच सकती है।

In perfect competition, the firm's demand curve is horizontal, i.e., it can sell any quantity at the prevailing market price.

चित्र: फर्म की मांग वक्र (Diagram: Firm’s Demand Curve) [यहाँ एक क्षैतिज रेखा बनाएं, जहां Y-अक्ष पर मूल्य (Price) और X-अक्ष पर मात्रा (Quantity)।]

(B) फर्म का राजस्व (Firm’s Revenue)

  1. औसत राजस्व (Average Revenue - AR):

प्रति इकाई विक्रय पर प्राप्त मूल्य।

Revenue per unit sold.

\[ AR = \frac{TR}{Q} \] जहां, AR = औसत राजस्व (Average Revenue) TR = कुल राजस्व (Total Revenue) Q = विक्रय मात्रा (Quantity sold)

  1. सीमांत राजस्व (Marginal Revenue - MR):

अतिरिक्त इकाई विक्रय करने पर प्राप्त अतिरिक्त राजस्व।

Additional revenue from the sale of one more unit.

\[ MR = \frac{\Delta TR}{\Delta Q} \] जहां, MR = सीमांत राजस्व (Marginal Revenue) ΔTR = TR में परिवर्तन (Change in total revenue) ΔQ = मात्रा में परिवर्तन (Change in quantity sold)

  1. कुल राजस्व (Total Revenue - TR):

कुल विक्रय से प्राप्त राशि।

Total earnings from sales.

\[ TR = P \times Q \] (जहां P = मूल्य, Q = मात्रा)

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में: AR = MR = Price

In perfect competition: AR = MR = Price

उदाहरण (Example): यदि बाजार मूल्य ₹10 है और फर्म 5 इकाइयाँ बेचती है:

  • TR = 10 × 5 = ₹50
  • AR = 50/5 = ₹10
  • MR = ₹10 (हर अतिरिक्त इकाई पर भी ₹10 ही मिलेगा)

3. लाभ अधिकतमकरण (Profit Maximization)

(A) लाभ की अवधारणा (Concept of Profit)

लाभ (Profit) = कुल आय (Total Revenue, TR) - कुल लागत (Total Cost, TC)

  • साधारण लाभ (Normal Profit):

वह लाभ जो फर्म को व्यवसाय में बने रहने के लिए आवश्यक होता है।

Profit required to keep the firm in the business.

  • असाधारण लाभ (Supernormal/Abnormal Profit):

साधारण लाभ से अधिक लाभ।

Profit over and above the normal profit.

(B) लाभ अधिकतमकरण की शर्तें (Conditions for Profit Maximization)

फर्म का उद्देश्य लाभ को अधिकतम करना है, अर्थात्, वह ऐसी मात्रा का चयन करेगी जहाँ उसे अधिकतम लाभ मिले।

दो मुख्य शर्तें (Two Main Conditions):

  1. MR = MC

(सीमांत राजस्व = सीमांत लागत, Marginal Revenue = Marginal Cost)

  1. MC का वक्र MR को नीचे से काटे

MC curve cuts MR curve from below

रेखाचित्र द्वारा स्पष्टिकरण (Graphical Explanation): Y-अक्ष पर लागत/राजस्व, X-अक्ष पर मात्रा। MC और MR वक्र बनाएं, जहां दोनों वक्र मिलते हैं, वहीं लाभ अधिकतम होता है।

(C) लाभ अधिकतमकरण की गणना (Calculation of Profit Maximization)

उदाहरण (Example): मान लीजिए, किसी फर्म के लिए

  • MC = ₹10
  • बाजार मूल्य (P) = ₹10 (अर्थात् MR = ₹10)

यहां MR = MC, अतः यह लाभ अधिकतम की स्थिति है।


4. अल्पावधि में फर्म का संतुलन (Short Run Equilibrium of Firm)

(A) अल्पावधि (Short Run) की परिभाषा

अल्पावधि वह अवधि है जिसमें फर्म अपने कुछ उत्पादन घटकों (Factors of Production) को परिवर्तित नहीं कर सकती (जैसे, मशीनरी, भवन)।

Short run is a period in which at least one factor of production is fixed.

(B) अल्पावधि संतुलन की स्थिति (Short Run Equilibrium Condition)

फर्म निम्नलिखित स्थितियों में हो सकती है:

  1. असाधारण लाभ (Supernormal Profit)
  2. साधारण लाभ (Normal Profit)
  3. हानि (Loss)

1. असाधारण लाभ (Abnormal Profit in Short Run): जब AR > AC, अर्थात् प्रति इकाई औसत राजस्व औसत लागत से अधिक है।

2. साधारण लाभ (Normal Profit in Short Run): जब AR = AC, अर्थात् फर्म को न लाभ, न हानि।

3. हानि (Loss in Short Run): जब AR < AC, अर्थात् औसत राजस्व औसत लागत से कम है।

किन्तु, यदि AR > AVC (Average Variable Cost), तो फर्म अल्पावधि में कार्य करती रहेगी, यद्यपि उसे हानि हो रही हो।

यदि AR < AVC, तो फर्म को उत्पादन बंद कर देना चाहिए।

(C) अल्पावधि संतुलन का चित्र (Diagrammatic Representation)

  1. असाधारण लाभ:
  • AR वक्र AC वक्र के ऊपर
  1. साधारण लाभ:
  • AR वक्र AC वक्र को स्पर्श करता है
  1. हानि:
  • AR वक्र AC वक्र के नीचे

शटडाउन बिंदु (Shut-down Point): जब AR = AVC, फर्म को उत्पादन रोक देना चाहिए।


5. दीर्घावधि में फर्म का संतुलन (Long Run Equilibrium of Firm)

(A) दीर्घावधि (Long Run) की परिभाषा

दीर्घावधि वह अवधि है जिसमें फर्म अपने सभी उत्पादन घटकों को परिवर्तित कर सकती है।

Long run is a period in which all factors of production are variable.

(B) दीर्घावधि संतुलन की स्थिति (Long Run Equilibrium Condition)

दीर्घावधि में, फर्म को केवल साधारण लाभ (Normal Profit) मिलता है।

संतुलन की शर्तें:

  1. MR = MC
  2. AR = AC = MC = MR = Price

स्पष्टीकरण (Explanation): यदि फर्म को दीर्घावधि में असाधारण लाभ मिलता है, तो नई फर्में प्रवेश करती हैं, जिससे आपूर्ति बढ़ती है और मूल्य घटता है, जब तक कि केवल साधारण लाभ न रह जाए।

If firms earn abnormal profits in the long run, new firms enter, increasing supply and reducing price until only normal profit remains.

रेखाचित्र (Diagram): AR व AC वक्र एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं, और MC वक्र उन्हें नीचे से काटता है।


6. बाजार की आपूर्ति (Market Supply)

(A) फर्म की आपूर्ति वक्र (Firm's Supply Curve)

अल्पावधि में, फर्म का आपूर्ति वक्र MC वक्र का वह भाग है, जो AVC से ऊपर है।

In the short run, a firm’s supply curve is the portion of its MC curve above the AVC curve.

(B) बाजार की आपूर्ति (Market Supply)

सभी फर्मों की आपूर्ति का योग (Sum of all firms’ supply)।

\[ Q_S = q_1 + q_2 + q_3 + ... + q_n \] जहाँ Q_S = बाजार की कुल आपूर्ति q_1, q_2, ..., q_n = प्रत्येक फर्म की आपूर्ति

(C) दीर्घावधि में बाजार की आपूर्ति (Long Run Market Supply)

दीर्घावधि में, बाजार मूल्य केवल साधारण लाभ की स्थिति में स्थिर होता है।

In the long run, market price stabilizes at a level where firms earn only normal profit.


7. पूर्ण प्रतिस्पर्धा के लाभ और सीमाएँ (Merits and Demerits of Perfect Competition)

(A) लाभ (Merits)

  1. संसाधनों का दक्षतम उपयोग (Optimum allocation of resources)
  2. उपभोक्ताओं को न्यूनतम मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध (Goods available to consumers at minimum prices)
  3. उत्पादकता में वृद्धि (Increase in productivity)
  4. तकनीकी सुधार की संभावना (Possibility of technological advancement)
  5. उत्पादन की अधिकतम मात्रा (Maximum output)

(B) सीमाएँ (Demerits)

  1. वास्तविक जीवन में दुर्लभ (Rare in real life)
  2. अनुसंधान व नवाचार की कमी (Lack of innovation)
  3. विज्ञापन की अनदेखी (No role of advertisement)
  4. उत्पाद विविधता का अभाव (No product differentiation)
  5. दीर्घकालीन आर्थिक लाभ का अभाव (No long-term economic profit)

📖 सुलझाए गए उदाहरण (Solved Examples)

उदाहरण 1:

प्रश्न: यदि किसी फर्म का MC = ₹12, बाजार मूल्य ₹12 है, और फर्म 20 इकाइयाँ बेच रही है, तो क्या फर्म संतुलन में है? उत्तर: पूर्ण प्रतिस्पर्धा में MR = Price = ₹12 चूंकि MR = MC, अतः फर्म संतुलन में है।


उदाहरण 2:

प्रश्न: किसी फर्म का TR = ₹600, Q = 30, TC = ₹570। लाभ ज्ञात करें। उत्तर: लाभ = TR - TC = ₹600 - ₹570 = ₹30


उदाहरण 3:

प्रश्न: यदि किसी फर्म की AC ₹18 है, AR ₹20, Q = 40, तो फर्म को कुल लाभ कितना है? उत्तर: प्रति इकाई लाभ = AR - AC = ₹2 कुल लाभ = ₹2 × 40 = ₹80


उदाहरण 4:

प्रश्न: पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म का AR व MR एकसमान क्यों होते हैं? उत्तर: क्योंकि फर्म को बाजार मूल्य पर जितनी चाहे उतनी मात्रा बेचने की स्वतंत्रता होती है, अतः प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के विक्रय पर भी वही मूल्य प्राप्त होता है।

AR and MR are equal as the firm can sell any quantity at the market price.


उदाहरण 5:

प्रश्न: अल्पावधि में फर्म कब उत्पादन बंद कर देती है? उत्तर: जब AR (या Price) < AVC, अर्थात् प्रति इकाई राजस्व औसत परिवर्ती लागत से भी कम हो जाए।


🧠 महत्वपूर्ण बिंदु (Important Points)

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म मूल्य-ग्रहिता होती है, मूल्य-निर्धारक नहीं।

Firms are price takers, not price makers.

  1. फर्म का मांग वक्र क्षैतिज होता है, अर्थात् पूर्ण लोचदार।

Firm's demand curve is horizontal, i.e., perfectly elastic.

  1. AR = MR = Price पूर्ण प्रतिस्पर्धा में लागू होता है।

AR = MR = Price in perfect competition.

  1. लाभ अधिकतम की शर्त: MR = MC

Profit maximization condition: MR = MC.

  1. अल्पावधि में फर्में लाभ, साधारण लाभ या हानि कमा सकती हैं।

In the short run, firms may earn profit, normal profit, or loss.

  1. दीर्घावधि में केवल साधारण लाभ संभव है।

Only normal profit possible in the long run.

  1. फर्म का आपूर्ति वक्र MC का AVC से ऊपर का भाग है।

Firm's supply curve is the part of MC above AVC.

  1. शटडाउन बिंदु पर AR = AVC होता है।

At shutdown point, AR = AVC.

  1. नवीन फर्मों का प्रवेश दीर्घावधि में असाधारण लाभ समाप्त कर देता है।

Entry of new firms wipes out abnormal profits in the long run.

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा में संसाधनों का दक्षतम उपयोग होता है।

Optimum allocation of resources occurs in perfect competition.


⚠️ सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes)

| क्रमांक | गलती (Mistake) | सुधार (Correction) | |--------|----------------|--------------------| | 1 | पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म मूल्य निर्धारित करती है | फर्म केवल बाजार मूल्य को स्वीकार करती है (Firm is a price taker, not price maker) | | 2 | अल्पावधि में फर्म को हमेशा लाभ होता है | अल्पावधि में फर्म को लाभ, साधारण लाभ या हानि हो सकती है (Firm may earn profit, normal profit or loss in short run) | | 3 | दीर्घावधि में फर्म को असाधारण लाभ मिल सकता है | दीर्घावधि में केवल साधारण लाभ संभव है (Only normal profit in long run) | | 4 | AR हमेशा AC के बराबर होता है | केवल दीर्घावधि संतुलन में AR = AC (AR = AC only in long run equilibrium) | | 5 | MR व MC के मिलने पर ही संतुलन होता है | MC को MR को नीचे से काटना चाहिए (MC must cut MR from below) | | 6 | फर्म का आपूर्ति वक्र पूरा MC वक्र होता है | केवल MC का AVC से ऊपर का भाग ही आपूर्ति वक्र है (Only MC above AVC is supply curve) | | 7 | शटडाउन बिंदु पर फर्म लाभ में होती है | शटडाउन बिंदु पर फर्म को हानि होती है, परंतु परिवर्ती लागत निकल आती है (At shutdown, firm covers only variable cost) | | 8 | पूर्ण प्रतिस्पर्धा में उत्पाद विविधता होती है | सभी फर्में एकसमान वस्तु बनाती हैं (All firms produce homogeneous product) | | 9 | दीर्घावधि में फर्में बाजार से बाहर नहीं जा सकतीं | दीर्घावधि में फर्में स्वतंत्र रूप से प्रवेश और निकास कर सकती हैं (Free entry and exit in long run) | | 10 | फर्म का मांग वक्र लचीला नहीं होता | फर्म का मांग वक्र पूर्णतः लचीला (Perfectly elastic) होता है (Firm’s demand curve is perfectly elastic) |


📝 RBSE परीक्षा प्रश्न (RBSE Exam Questions)

1-Mark Questions (1 अंक के प्रश्न)

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म किस प्रकार की वस्तु का विक्रय करती है?

What type of product does a firm sell in perfect competition?

  1. अल्पावधि में फर्म कब उत्पादन बंद करती है?

When does a firm shut down production in the short run?

  1. दीर्घावधि में फर्म को किस प्रकार का लाभ प्राप्त होता है?

What type of profit does a firm earn in the long run?

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म का मांग वक्र कैसा होता है?

What is the nature of a firm's demand curve in perfect competition?

  1. लाभ अधिकतम की कौन-सी शर्त है?

What is the condition for profit maximization?


2-Mark Questions (2 अंक के प्रश्न)

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

Write two main features of perfect competition.

  1. फर्म का आपूर्ति वक्र परिभाषित कीजिए।

Define the supply curve of a firm.

  1. अल्पावधि व दीर्घावधि में फर्म के लाभ में क्या अंतर है?

Differentiate between profits of a firm in the short run and long run.

  1. शटडाउन बिंदु क्या है?

What is the shut-down point?

  1. सीमांत राजस्व व औसत राजस्व में क्या संबंध है?

What is the relation between marginal revenue and average revenue?


5-Mark Questions (5 अंक के प्रश्न)

  1. पूर्ण प्रतिस्पर्धा की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।

Explain the features of perfect competition in detail.

  1. लाभ अधिकतमकरण की शर्तों का रेखाचित्र सहित वर्णन कीजिए।

Explain, with diagram, the conditions for profit maximization.

  1. अल्पावधि में फर्म के संतुलन की अवस्थाएँ एवं चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।

Explain, with diagram, the equilibrium of a firm in the short run.

  1. दीर्घावधि संतुलन में फर्म की स्थिति का विश्लेषण कीजिए।

Analyse the position of a firm in the long run equilibrium.

  1. फर्म की मांग व राजस्व वक्र पूर्ण प्रतिस्पर्धा में किस प्रकार होते हैं?

Explain the nature of the demand and revenue curves of a firm under perfect competition.


नोट: यह अध्ययन-सामग्री NCERT-स्तरीय, परीक्षा हेतु उपयुक्त एवं द्विभाषीय (हिन्दी-अंग्रेज़ी) है। इसमें सभी आवश्यक परिभाषाएँ, सूत्र, उदाहरण, रेखाचित्र, प्रमुख बिंदु, सामान्य गलतियाँ, एवं संभावित परीक्षा प्रश्न सम्मिलित हैं।

This study material is NCERT-quality, exam-focused, and fully bilingual. It covers all essential definitions, formulas, solved examples, diagrams, key points, common mistakes, and likely exam questions.

मुख्य बिंदु (Key Points)

  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा एक ऐसी बाजार संरचना है जिसमें बहुत अधिक संख्या में खरीदार और विक्रेता एकसमान वस्तुओं का लेन-देन करते हैं।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म मूल्य निर्धारक नहीं, बल्कि मूल्य ग्रहणकर्ता होती हैं क्योंकि मूल्य का निर्धारण बाजार द्वारा होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में किसी व्यक्तिगत फर्म के लिए मांग वक्र पूर्णतः प्रत्यास्थ (क्षैतिज रेखा) होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म बाजार में प्रचलित मूल्य पर अपनी इच्छानुसार कोई भी मात्रा बेच सकती है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का मुख्य उद्देश्य लाभ अधिकतम करना होता है।
  • फर्म तब अधिकतम लाभ अर्जित करती है जब उसकी सीमांत लागत (MC) सीमांत आय (MR) के बराबर होती है।
  • स्वल्पावधि में फर्म असामान्य लाभ, सामान्य लाभ या हानि कमा सकती है।
  • दीर्घावधि में फर्मों के स्वतंत्र प्रवेश और निर्गमन के कारण केवल सामान्य लाभ ही प्राप्त होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में वस्तुएँ एकसमान होने के कारण विक्रय व्यय नहीं होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में संसाधनों का सर्वोत्तम आवंटन होता है, जिससे सामाजिक कल्याण अधिकतम होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्म की आपूर्ति वक्र उसकी सीमांत लागत वक्र का औसत परिवर्ती लागत से ऊपर का बढ़ता हुआ भाग होता है।
  • पूर्ण प्रतिस्पर्धा में फर्मों के लिए प्रवेश या निर्गमन पर कोई बाधा नहीं होती है।

Key Points

  • Perfect competition is a market structure characterized by a large number of buyers and sellers dealing in homogeneous products.
  • Under perfect competition, firms are price takers, not price makers, as the market determines the price.
  • The demand curve faced by an individual firm under perfect competition is perfectly elastic (horizontal line).
  • A firm under perfect competition can sell any quantity of output at the prevailing market price.
  • Profit maximization is the main objective of a firm under perfect competition.
  • A firm maximizes profit where marginal cost (MC) equals marginal revenue (MR).
  • In the short run, a firm may earn abnormal profit, normal profit, or incur losses.
  • In the long run, firms earn only normal profit due to free entry and exit of firms.
  • There is no selling cost under perfect competition as products are identical.
  • Resources are optimally allocated under perfect competition, leading to maximum social welfare.
  • The supply curve of a firm under perfect competition is the rising part of the marginal cost curve above the average variable cost.
  • There are no barriers to entry or exit for firms in perfect competition.

इंटरैक्टिव अभ्यास (MCQ)

निम्नलिखित में से कौन पूर्ण प्रतिस्पर्धा की एक प्रमुख विशेषता है?

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में किसी व्यक्तिगत फर्म का माँग वक्र कैसा होता है?

स्वल्पावधि में, एक पूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक फर्म क्या कमा सकती है?

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में, मूल्य (P) और सीमांत आय (MR) के बीच क्या संबंध होता है?

पूर्ण प्रतिस्पर्धा में मूल्य किसके द्वारा निर्धारित होता है?

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